गृह, लोग, प्यार - (ख़ुर्शीद - सूर्य)
"गृह, लोग, प्यार" (ख़ुर्शीद - सूर्य)"
🍎🍒👐
इंतजार था दिनों से!हुआ सहसा घर को आना!
हमें प्यार था जनों से
और उनका मुस्कुराना।
🍅🍁💥
थी दूर वहाँ थी बंदिश;
दिक्कत का क्या बताना!
दीदार कर मैं ख़ुर्शीद!
मिली जा के आशियाना।
थी दूर वहाँ थी बंदिश;
दिक्कत का क्या बताना!
दीदार कर मैं ख़ुर्शीद!
मिली जा के आशियाना।
- ऋषि

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